01/09/2025
।।।।।।।।।।।सर्बधर्मान्परितेज्य मामेकम सरणम ब्रज ।।।।।।।।।।।।
।।।।।।।।।अहम त्वा सर्ब पापेभ्यो मोछयिस्यामि मा सुच।।।।।।।।।।
जिबन कि मङलाचरण और कर्म कि कारण से हि सभिकि प्रारम्भ कि रेखांकन होगा पुनर्जन्म कि पुर्बकृत कर्म भि सामिल होगि हि फिर सारा कर्म और अकर्म रासि भस्म कैसे होगि प्रभु।। काम क्रोध लोभ मोह इस्या अहङ्कार मद मत्सर आदि जैसि सब्द रुपि सुच्म बिज इस स्थुल सरिर कि अन्दर कारण और सुच्म सरिर मे जल कि मुल कि भाती उत्पन्न होता हि क्यु ।।प्रभु ।। अभितक कि जिब।। और बाकि जो उत्पन्न हुनेवाला सम्पुर्ण सारा जिब इस चपेटा कि बन्धन और आप कि माया कि जाल को पार कर्के हि मुक्ति कि अधिकारी होगा कयौं बार शृस्टि उत्पन्न हुवा होगा अनन्त बार हम भि मुक्ति कि लिय इस मृत्यु लोककि यात्री बन चुके होङे हमे कुछ याद नहि प्रभु हमारि सारा पुन्य कर्म और अपुन्य कर्म जलाने मे हमारि कुछ सामर्थ्य नहि हे।। नहि हे ।।नहि हे।।हमारि जिबन कि उतरार्ध तक कि।। यात्रा तो गुरु किर्पा और आप कि किर्पा से हि मिला हे इस्वर हे सर्बेस्वर हे सर्ब ज्ञाता सारा लोकको मालिकको भि थर थर कमानेवाले काल और भय को भि बसमे पार्ने वाले आप कि।। लीलामणि धन्य हो धन्य हो आप और श्री श्री गुरु जि कि किर्पा मिले तो असम्भव को भि सम्भब बना सक्ते हो हमारि हृदय कि भाबना और सारा इच्छा चाहना कामना रुपि बिज हमारि हृदय मे अंकुरण कि खडेरी लगादो प्रभु सत्सङ हरि गुरु सन्त और गौ सेवा मे हि हमारि जिबन कि स्वास कि अन्तिम गिन्ति हो सके हमे किर्पा करो।।येहि हमारि करुण पुकार हे।।।जय गुरु देब भगवान कि जय जय हो ।।सभि मृत्यु लोक बासि और सम्पुर्ण को अनन्त अनन्त कोटि जय जय श्री राधे ।।।सभि लोक सत मार्ग मे हि जिना सिके।।।। जियो और जिने दो।।।। जय श्री राधे ॐ सान्ती।।जय गुरु देब सत्यमेब जयते।