27/10/2026
🌷 श्री उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी स्तोत्र 🌷
(हिन्दी अर्थ सहित)
🌹॥ श्री प्रचण्डिका उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी ध्यानम् ॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं॥
श्वेतवर्णां महाघोरां श्वेतशवोपरिस्थिताम्।
पञ्चवक्त्रां त्रिनेत्राढ्यां सिद्धलक्ष्मीं नमाम्यहम्॥१॥
नृमुण्डकुण्डलां देवीं व्याघ्रचर्मावृतां कटिम्।
नरास्थिभूषणां रौद्रीं मुक्तकेशीं नमाम्यहम्॥२॥
षोडशभुजसमायुक्तां बद्धयोगपट्टधारिणीम्।
शुष्कावयवभूषाढ्यां महारौद्रीं नमाम्यहम्॥३॥
खड्गं बाणं च शूलं च चक्रं शक्तिं गदामपि।
जपमालां च कर्तरीं धारयन्तीं भजेऽनिशम्॥४॥
फलकं कार्मुकं नागपाशं परशुं तथा।
डमरुं नरमुण्डं चैव कपालं बिभ्रतीं भजे॥५॥
उग्रतेजोमयीं देवीं दीर्घाङ्गीं घोरदर्शनाम्।
सिद्धविष्णुप्रियां लक्ष्मीं ध्यायामि परमेश्वरीम्॥६॥
हिन्दी अर्थ—
मैं श्वेतवर्णा, अत्यन्त उग्र, श्वेत शव पर विराजमान, पाँच मुखों और तीन-तीन नेत्रों से युक्त सिद्धलक्ष्मी का ध्यान करता हूँ।
वे नरमुण्डों के कुण्डल धारण करती हैं। उनकी कटि व्याघ्रचर्म से आवृत है। वे नर-अस्थियों के आभूषणों से विभूषित, मुक्तकेशी तथा रौद्रस्वरूपा हैं।
वे सोलह भुजाओं वाली, योगपट्ट धारण करने वाली और शुष्क अंगों के आभूषणों से सुशोभित महारौद्री हैं। उनके हाथों में खड्ग, बाण, त्रिशूल, चक्र, शक्ति, गदा, जपमाला, कर्तरी, ढाल, धनुष, नागपाश, परशु, डमरु, नरमुण्ड और कपाल हैं।
वे उग्र तेज से युक्त, दीर्घ अंगों वाली और अत्यन्त भयंकर स्वरूपा हैं। ऐसी परमेश्वरी, भगवान सिद्धविष्णु की प्रियतमा सिद्धलक्ष्मी का मैं ध्यान करता हूँ।।
🌹 ॥ अथ श्री उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी स्तोत्रम् ॥ 🌹
🍁 श्वेतवर्णे महाघोरे श्वेतशवोपरिस्थिते।
पञ्चवक्त्रे महादेवि उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥१॥
अर्थ — श्वेतवर्णा, महाघोरा, श्वेत शव पर विराजमान तथा पाँच मुखों वाली महादेवी उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 पञ्चवक्त्रे त्रिनेत्राढ्ये मुक्तकेशि महेश्वरि।
नृमुण्डकुण्डलधरे उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२॥
अर्थ — पाँच मुखों और प्रत्येक मुख में तीन नेत्रों वाली, मुक्तकेशी, नरमुण्डों के कुण्डल धारण करने वाली महेश्वरी उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 व्याघ्रचर्मावृतकटि नरास्थिभूषणोज्ज्वले।
महारौद्रस्वरूपे त्वं कालभञ्जिकासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३॥
अर्थ — कटि पर व्याघ्रचर्म धारण करने वाली, नर-अस्थियों के आभूषणों से सुशोभित तथा महारौद्रस्वरूपा कालभञ्जिका सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 षोडशभुजसमायुक्ते बद्धयोगपट्टधारिणि।
शुष्कावयवभूषाढ्ये महाघोरासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥४॥
अर्थ — सोलह भुजाओं वाली, योगपट्ट धारण करने वाली तथा शुष्क अंगों के आभूषणों से विभूषित महाघोरा सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 खड्गबाणधरे देवि शूलचक्रविराजिते।
शक्तिगदाधरे लक्ष्मि उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥५॥
अर्थ — खड्ग और बाण धारण करने वाली, शूल तथा चक्र से सुशोभित और शक्ति एवं गदा धारण करने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 जपमालाकर्तरीधारिणि फलकायुधधारिणि।
कार्मुकं नागपाशं च बिभ्रति त्वं नमोऽस्तु ते॥६॥
अर्थ — जपमाला, कर्तरी और ढाल धारण करने वाली तथा धनुष और नागपाश धारण करने वाली देवी! आपको नमस्कार है।
🍁 परशुं डमरुं चैव नरमुण्डं कपालकम्।
धारयन्तीं महादेवीं उग्रवीरसिद्धलक्ष्मीं नमाम्यहम्॥७॥
अर्थ — परशु, डमरु, नरमुण्ड और कपाल धारण करने वाली महादेवी उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी को मैं प्रणाम करता हूँ।
🍁 सिद्धविष्णुप्रिये देवि विष्णुवक्षःस्थलालये।
वैष्णवि विष्णुमाये त्वं कालभञ्जिकासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥८॥
अर्थ — हे सिद्धविष्णुप्रिया देवी! आप भगवान विष्णु के वक्षःस्थल में निवास करने वाली, वैष्णवी तथा विष्णुमाया स्वरूपा हैं। कालभञ्जिका सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 नारायणप्रिये नित्ये जगन्मङ्गलकारिणि।
लक्ष्मीरूपे जगन्मातः महाघोरासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥९॥
अर्थ — हे नित्य नारायणप्रिया! आप जगत् का मंगल करने वाली तथा लक्ष्मीस्वरूपा जगन्माता हैं। महाघोरा सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 क्षीराब्धितनये देवि पद्मालये मनोहरे।
श्रीसम्पत्प्रददे मातः उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥१०॥
अर्थ — क्षीरसागर की पुत्री, कमल में निवास करने वाली, मनोहर स्वरूपा तथा श्री-सम्पत्ति प्रदान करने वाली माता उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 योगमाये महादेवि योगनिद्रास्वरूपिणि।
जगदुत्पत्तिकारिणि उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥११॥
अर्थ — हे महादेवी योगमाया! आप योगनिद्रास्वरूपा तथा जगत् की उत्पत्ति की शक्ति हैं। उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 देवानां कार्यसिद्ध्यर्थं प्रादुर्भूता महेश्वरि।
दैत्यदर्पविनाशिनि कालभञ्जिकासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥१२॥
अर्थ — देवताओं के कार्य की सिद्धि के लिए प्रकट होने वाली, दैत्यों के दर्प का नाश करने वाली महेश्वरी कालभञ्जिका सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 अपराजिते महाशक्ते सर्वशत्रुविनाशिनि।
दुर्जयां दुर्गरूपां त्वां महाघोरासिद्धलक्ष्मि नमाम्यहम्॥१३॥
अर्थ — हे अपराजिता महाशक्ति! आप शत्रुओं की दुष्टता और बाधाओं का नाश करने वाली तथा दुर्जेय दुर्गास्वरूपा महाघोरा सिद्धलक्ष्मी हैं। मैं आपको प्रणाम करता हूँ।
🍁 असाध्यसाधिनि देवि दुर्गमापद्विनाशिनि।
अजेये विजयप्राप्ते उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥१४॥
अर्थ — असाध्य कार्यों को साधने वाली, दुर्गम संकटों का नाश करने वाली, अजेय तथा विजय प्रदान करने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 प्रत्यङ्गिरे महाशक्ते उग्रतेजःस्वरूपिणि।
दुष्टशक्तिप्रशमनि उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥१५॥
अर्थ — हे प्रत्यङ्गिरा महाशक्ति! आप उग्र तेज की स्वरूपा तथा दुष्ट शक्तियों को शान्त करने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी हैं। आपको नमस्कार है।
🍁 सिंहनादप्रचण्डास्ये भयकम्पितदुष्टके।
रक्ष मां सर्वदा देवि कालभञ्जिकासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥१६॥
अर्थ — प्रचण्ड सिंहनाद से दुष्टों के हृदय में भय उत्पन्न करने वाली देवी! मेरी सदा रक्षा कीजिए। हे कालभञ्जिका सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 महाकालीस्वरूपे त्वं महादुर्गे महाबले।
महामायास्वरूपिणि महाघोरासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥१७॥
अर्थ — आप महाकालीस्वरूपा, महादुर्गा, महाबलशालिनी तथा महामायास्वरूपा महाघोरा सिद्धलक्ष्मी हैं। आपको नमस्कार है।
🍁 भद्रकालीस्वरूपे त्वं चण्डिके दुष्टमर्दिनि।
धर्मसंस्थापनकरी उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥१८॥
अर्थ — आप भद्रकालीस्वरूपा, चण्डिका, दुष्टों का दमन करने वाली तथा धर्म की स्थापना करने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी हैं। आपको नमस्कार है।
🍁 कामं क्रोधं च लोभं च मोहं मदमत्सरम्। दहसि ज्ञानदीप्त्या त्वमुग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥१९॥
अर्थ — आप ज्ञान के प्रकाश से काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर जैसे मनोविकारों को जलाने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी हैं। आपको नमस्कार है।
🍁 योगिनीनां च शक्तीनां गणैः परिवृताम्बिके। शाकिनीयोगिनीसेव्ये कालभञ्जिकासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२०॥
अर्थ — योगिनियों और शक्तियों के समूहों से परिवृत्त अम्बिका! शाकिनियों तथा योगिनियों द्वारा सेवित कालभञ्जिका सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 प्रेतभूतगणैः सेव्या श्मशानालयवासिनि।
भयङ्करि महाघोरे महाघोरासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२१॥
अर्थ — प्रेत और भूतगणों से सेवित, श्मशान में निवास करने वाली, भयंकर तथा महाघोरा सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 दारिद्र्यदावदग्धानां त्वमेव परमौषधम्।
दुःखशोकप्रशमनि उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२२॥
अर्थ — दारिद्र्यरूपी दावाग्नि से संतप्त जनों के लिए आप ही परम औषधि हैं। हे उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 दुर्भाग्यतिमिरध्वान्तभेदिनि ज्ञानदीपिके।
आशानवप्रभादात्रि उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२३॥
अर्थ — दुर्भाग्यरूपी अन्धकार को दूर करने वाली, ज्ञान का दीप जलाने वाली तथा आशा का नया प्रकाश देने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 आलस्यं च प्रमादं च दैन्यं मोहं च नाशय।
उद्योगबुद्धिदात्रि त्वं कालभञ्जिकासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२४॥
अर्थ — मेरे आलस्य, प्रमाद, दीनभाव और मोह का नाश कीजिए। उद्योगशीलता तथा सद्बुद्धि प्रदान करने वाली कालभञ्जिका सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 कर्मशक्तिप्रदे मातः साहसोत्साहदायिनि।
कर्तव्यपथसञ्चारिणि महाघोरासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२५॥
अर्थ — हे माता! कर्मशक्ति, साहस और उत्साह प्रदान करने वाली तथा कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाली महाघोरा सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 धनधान्यप्रदे देवि सुवर्णसम्पत्प्रदायिनि।
गृहसमृद्धिदात्रि त्वं उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२६॥
अर्थ — धन-धान्य, स्वर्णसम्पत्ति और गृहस्थ जीवन में समृद्धि प्रदान करने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 ऐश्वर्यज्ञानसम्पत्तिदायिनि शुभकारिणि।
विवेकबुद्धिसन्दात्रि उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२७॥
अर्थ — ऐश्वर्य, ज्ञान और सम्पत्ति प्रदान करने वाली तथा विवेक-बुद्धि देने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 अमङ्गलप्रशमनि मङ्गलानां च मङ्गले।
कल्याणसम्पदां दात्रि कालभञ्जिकासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२८॥
अर्थ — अमंगल को शान्त करने वाली, समस्त मंगलों में परम मंगलस्वरूपा तथा कल्याणकारी सम्पदाएँ देने वाली कालभञ्जिका सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 शरणागतपालिनि त्वं भक्ताभीष्टप्रदायिनि।
भयशोकविनाशिनि महाघोरासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२९॥
अर्थ — शरणागतों की रक्षा करने वाली, भक्तों की अभीष्ट कामनाएँ पूर्ण करने वाली तथा भय-शोक का नाश करने वाली महाघोरा सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 विपत्तौ धैर्यदात्रि त्वं सङ्कटे मार्गदर्शिनि।
आश्रितानां हिते रक्ता उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३०॥
अर्थ — विपत्ति में धैर्य प्रदान करने वाली, संकट में मार्ग दिखाने वाली तथा आश्रितों के हित में तत्पर उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 रोगशोकभयघ्नि त्वं क्लेशसन्तापनाशिनि।
शान्तिसौख्यप्रदे देवि उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३१॥
अर्थ — रोग, शोक और भय को दूर करने वाली, क्लेश-संताप का नाश करने वाली तथा शान्ति-सुख प्रदान करने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 कुटुम्बपोषणकरि जीविकासाधनप्रदे।
अन्नवस्त्रप्रदात्रि त्वं कालभञ्जिकासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३२॥
अर्थ — परिवार का पालन-पोषण करने में सहायक, आजीविका के साधन देने वाली तथा अन्न-वस्त्र प्रदान करने वाली कालभञ्जिका सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 सद्बुद्धिं धर्मनिष्ठां च सत्कर्मसु रुचिं कुरु।
दुराचारविनाशिनि महाघोरासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३३॥
अर्थ — मुझे सद्बुद्धि, धर्मनिष्ठा और सत्कर्मों में रुचि प्रदान कीजिए। दुराचार का नाश करने वाली महाघोरा सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 लोभं मोहं च दम्भं च मत्सरं च विनाशय।
सन्तोषशक्तिदात्रि त्वं उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३४॥
अर्थ — मेरे लोभ, मोह, दम्भ और मत्सर का नाश कीजिए। सन्तोष और सदाचार की शक्ति प्रदान करने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 अविवेकान्धकारघ्ने ज्ञानविज्ञानदायिनि।
बुद्धिप्रज्ञाप्रकाशिनि उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३५॥
अर्थ — अविवेक के अन्धकार को दूर करने वाली, ज्ञान-विज्ञान प्रदान करने वाली तथा बुद्धि और प्रज्ञा को प्रकाशित करने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 निष्फलश्रमदुःखघ्नि सफलोद्योगकारिणि।
न्यायमार्गप्रदर्शिनि कालभञ्जिकासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३६॥
अर्थ — निष्फल परिश्रम से उत्पन्न दुःख को दूर करने वाली, उद्योग में सफलता के लिए प्रेरित करने वाली तथा न्याय का मार्ग दिखाने वाली कालभञ्जिका सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 ऋणक्लेशविमोचिनि सङ्कटाब्धितारिणि।
धैर्यकर्मबलप्रदे महाघोरासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३७॥
अर्थ — ऋणजनित क्लेश से मुक्ति का मार्ग दिखाने वाली, संकट-समुद्र से पार उतारने वाली तथा धैर्य, कर्मशक्ति और आत्मबल प्रदान करने वाली महाघोरा सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 अल्पसम्पद्विहीनानां दीनानामवलम्बने।
करुणार्द्रे महादेवि उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३८॥
अर्थ — अल्पसम्पन्न और असहाय जनों का सहारा बनने वाली, करुणा से आर्द्र हृदय वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये सर्वकल्याणकारिणि।
भक्तवत्सले मातरुग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३९॥
अर्थ — समस्त मंगलों में परम मंगलस्वरूपा, सर्वकल्याण करने वाली तथा भक्तवत्सला उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 दुर्गमे दुर्गरूपे त्वं दुष्टदर्पविनाशिनि।
धर्मसंस्थापनकरि कालभञ्जिकासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥४०॥
अर्थ — दुर्गम संकटों में दुर्गास्वरूपा, दुष्टों के दर्प का नाश करने वाली तथा धर्म की स्थापना करने वाली कालभञ्जिका सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 उग्ररूपे महाशक्ते करुणामयि शाश्वति।
भक्तानां भयसंहर्त्रि महाघोरासिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥४१॥
अर्थ — उग्ररूपा महाशक्ति, करुणामयी और शाश्वती देवी! भक्तों के भय का नाश करने वाली महाघोरा सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 मन्त्रज्ञानप्रदे देवि ज्ञानविज्ञानरूपिणि।
अन्तर्बलप्रदात्रि त्वं उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥४२॥
अर्थ — मन्त्रज्ञान और आध्यात्मिक विवेक प्रदान करने वाली, ज्ञान-विज्ञानस्वरूपा तथा आन्तरिक बल देने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 भक्त्या त्वां पूजयन्तो ये धर्ममार्गे व्यवस्थिताः।
तेषां चित्ते वसेर्लक्ष्मि उग्रवीरसिद्धलक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥४३॥
अर्थ — जो भक्त श्रद्धापूर्वक आपकी पूजा करते हैं और धर्ममार्ग पर स्थित रहते हैं, उनके चित्त में निवास करने वाली उग्रवीर सिद्धलक्ष्मी! आपको नमस्कार है।
🍁 सर्वेषां प्राणिनां देवि कल्याणं भवतु ध्रुवम्।
धर्मयुक्ता समृद्धिश्च लोके सर्वत्र वर्धताम्॥४४॥
अर्थ — हे देवी! समस्त प्राणियों का कल्याण हो तथा धर्म से युक्त समृद्धि संसार में सर्वत्र बढ़ती रहे।
🍁 सिद्धविष्णुप्रिये मातर्योगमाये अपराजिते।
प्रत्यङ्गिरे महाशक्ते कालभञ्जिके नमोऽस्तु ते॥४५॥
अर्थ — हे सिद्धविष्णुप्रिया माता! हे योगमाया! हे अपराजिता! हे प्रत्यङ्गिरा महाशक्ति! आप कालभञ्जिका सिद्धलक्ष्मीस्वरूपा हैं। आपको बारम्बार नमस्कार है।
🌺 ॥ श्रीसिद्धलक्ष्मी प्रार्थना ॥ 🌺
मातः सिद्धलक्ष्मि देवि करुणासागरप्रिये।
मम दोषान् क्षमस्वाद्य प्रसन्ना भव सर्वदा॥
दारिद्र्यदुःखसन्तप्तं जनं मां शरणागतम्।
उद्धरस्व महालक्ष्मि धर्ममार्गे नियोजय॥
मम कर्मसु कौशलं च उद्यमे स्थैर्यमेव च।
चित्ते प्रसन्नतां देहि गृहशान्तिं च शाश्वतीम्॥
सर्वेषां प्राणिनां देवि कल्याणं भवतु ध्रुवम्।
धर्मयुक्ता समृद्धिश्च लोके सर्वत्र वर्धताम्॥
हिन्दी अर्थ —
हे माता सिद्धलक्ष्मी! आप करुणा की सागर हैं। मेरे दोषों को क्षमा कीजिए और सदा प्रसन्न रहिए।
दारिद्र्य और दुःख से संतप्त होकर आपकी शरण में आए हुए मुझ भक्त का उद्धार कीजिए तथा मुझे धर्ममार्ग पर चलाइए।
मेरे कर्मों में कौशल, उद्योग में स्थिरता, चित्त में प्रसन्नता और घर में शाश्वत शान्ति प्रदान कीजिए।
हे देवी! समस्त प्राणियों का कल्याण हो और धर्मयुक्त समृद्धि संसार में सर्वत्र बढ़ती रहे।
॥ इति श्रीउग्रवीरसिद्धलक्ष्मीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
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