01/01/2025
*1 जनवरी का इतिहास*
*पूरी दुनिया में 1 जनवरी को नव वर्ष मनाया जाता है लेकिन पहले ऐसा नही था, नववर्ष सबसे पहले बेबीलोन में मनाया जाता था। लेकिन उस समय नववर्ष का ये त्यौहार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि (हिन्दुओं का नववर्ष) भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी ये तिथि नव वर्षोत्सव के लिए चुनी गई थी लेकिन रोम के तानाशाह जूलियस सीजर के शासनकाल में जूलियन कैलेंडर की स्थापना की, उस समय विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया। उसके बाद बहुत से ईसाई समुदाय देशों में 1 जनवरी से नववर्ष मनाने लगे।*
*बात करे भारत देश की तो भारत मे अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कम्पनी की 1757 में स्थापना की। उसके बाद भारत को 190 साल तक गुलाम बनाकर रखा गया। अंग्रेजो ने भारत की ऋषि-मुनियों की प्राचीन सनातन संस्कृति को मिटाने में कार्यरत थे। लॉड मैकाले ने भारत का इतिहास बदलने का प्रयास किया जिसमें गुरुकुलों में हमारी वैदिक शिक्षण पद्धति को बदला गया।*
*क्योंकि ईसाई समुदाय जूलियन कैलेंडर को मानने लगे थे इसलिए अंग्रेज जब भारत आए तो यहा भी उसी कैलेंडर का उपयोग करते थे, जिस वजह से भारत मे सभी कार्य अंग्रेजो के कैलेंडर के हिसाब से होने लगा। और धीरे धीरे पूरी दुनिया अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से चलने लगी। ओर धीरे धीरे भारतीय अपने मूल इतिहास को भूल गये और अंग्रेजों का गुलाम बनाने वाले इतिहास याद रह गया और हद तो तब हो जाती है जब हम भी एक दूसरे को अंग्रजी कैलेंडर नववर्ष की बधाई देने लग गए हैं। और हिन्दू नववर्ष की बधाई देना भूल गए है। आज हालात ये है कि भारत में जितना धूमधाम से अंग्रेजी नववर्ष मानते हैं उतना हिन्दू नववर्ष नहीं मनाया जाता है। आज भारतवासी सृष्टि की रचना तिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष नहीं मनाकर 1 जनवरी को ही नववर्ष मनाने लगे।*
*इतना कुछ होने के बाद भी हिंदू कैलेंडर का महत्व खत्म नहीं हुआ आज भी है सबसे ज्यादा उपयोगी है। क्योंकि जब बच्चा पैदा होता है तो संस्कृति कर्मकांड के द्वारा उसका नामकरण अंग्रेजी कैलेंडर से नहीं हिन्दू कैलेंडर (पंचांग) से किया जाता है । ग्रहदोष भी हिन्दू कैलेंडर (पंचांग) से देखे जाते हैं और विवाह, जन्मकुंडली आदि का मिलान भी हिन्दू पंचाग से ही होता है। सभी व्रत, त्यौहार हिन्दू पंचाग से आते हैं। मरने के बाद तेरहवाँ भी हिन्दू पंचाग से ही देखा जाता है। मकान का उद्घाटन, जन्मपत्री, स्वास्थ्य रोग और अन्य सभी समस्याओं का निराकरण भी हिन्दू कैलेंडर (पंचांग) से ही होता है।*
*आप जानते हैं कि रामनवमी, जन्माष्टमी, होली, दीपावली, राखी, भाई दूज, करवा चौथ, एकादशी, शिवरात्री, नवरात्रि, दुर्गापूजा सभी विक्रमी संवत कैलेंडर से ही निर्धारित होते हैं । इंग्लिश कैलेंडर में इनका कोई स्थान नहीं होता।*
*सोचिये! आपके इस जीवन में इंग्लिश नववर्ष या कैलेंडर का स्थान है कहाँ ?*
*1 जनवरी को क्या नया हो रहा है..????*
*न ऋतु बदली... न मौसम...न कक्षा बदली...न सत्र....न फसल बदली...न खेती.....न पेड़ पौधों की रंगत...न सूर्य चाँद सितारों की दिशा.... ना ही नक्षत्र... बस नए साल के नाम पर करोड़ो /अरबों जीवों की हत्या व करोड़ों /अरबों गैलन शराब का पान व रात पर फूहडता अवश्य होगी।*
*भारतीय संस्कृति हिन्दू नववर्ष ही नया साल है.... जब ब्रह्माण्ड से लेकर सूर्य चाँद की दिशा, मौसम, फसल, कक्षा, नक्षत्र, पौधों की नई पत्तियां, किसान की नई फसल, विद्यार्थी की नई कक्षा, मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते हैं जो विज्ञान आधारित है और चैत्र नवरात्रि का पहला दिन होने के कारण घर, मन्दिर, गली, दुकान सभी जगह पूजा-पाठ व भक्ति का पवित्र वातावरण होता है।*
*अतः भारतवासी अपनी मानसिकता को बदलें, विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने और 1 जनवरी को नाचे कूदे धूम मचाए लेकिन चैत्री शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन ही नूतन वर्ष मनाये। 🙏🏼*
*Rajkumar Dubey (Astro IPS Energy)*
*ज्योतिष एवं वास्तु समाधान केंद्र*
*कुंडली विश्लेषण । हस्तरेखा विश्लेषण । अंक ज्योतिष । वास्तु विश्लेषण | उच्च स्तरीय लैब द्वारा प्रमाणित नेचुरल रत्न (Gemstones)*
http://wa.me/+919325257738
Facebook - https://www.facebook.com/astroips?mibextid=ZbWKwL
Instagram - https://www.instagram.com/astro.ips