04/08/2025
नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मै “न” काराय नमः शिवाय॥ यह पंचाक्षर स्तोत्र का एक भाग है, जो भगवान शिव के विभिन्न पहलुओं का वर्णन करता है। इसका अर्थ है "जो नागों का हार पहने हैं, तीन नेत्रों वाले हैं, भस्म से सुशोभित हैं, महान ईश्वर हैं, नित्य और शुद्ध हैं, दिशाओं को वस्त्र के समान धारण करने वाले हैं, उन 'न' कार रूपी शिव को नमस्कार।"